सोमवार, 23 मार्च 2026

इनमें से कोई नहीं

जो विवेकी है 

वह करुणा से भरा है 

जो करुणा से भरा है 

वह उदार है

जो उदार है 

वह सहिष्णु है

जो सहिष्णु है 

वह शोषित है

जो शोषित है 

वह वंचित है

जो वंचित है 

वह सुदामा है।

ब्राह्मण

सौंप कर तुम्हें सत्ता

स्वयं सुदामा हो जाता है

जिस पर आरोप हैं 

कि उसने 

नहीं ढकने दिये तुम्हें स्तन

नहीं पीने दिया तुम्हें जल

नहीं लेने दिया तुम्हें ज्ञान

राज्याश्रित गुरुकुलों में।

ब्राह्मण 

अवाक है

भीग कर काँप रहा है 

आरोपों की वर्षा में,

भयभीत है

तुम्हारी धमकियों से।

राजा 

अट्टहास कर रहा है

देखकर दुर्दशा

सुदामा की।

हे राजाधिराज!

आप शक्तिशाली हैं

क्यों नहीं कर देते 

एक और हिंदूकुश

एक और उन्नीस नब्बे

एक और चितपावन नरसंहार

जी लेना फिर

जी भर 

ढककर स्तन

पीकर जल

और लूट कर सारा ज्ञान।

किंतु ध्यान रहे

ब्राह्मण मरता नहीं

क्षत्रिय हारता नहीं

वैश्य निरुपाय होता नहीं

और शूद्र अनुद्यमी होता नहीं।

तुम 

इनमें से कोई भी नहीं हो।

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