शनिवार, 28 मार्च 2026

अनार्य दर्शन

दैत्य नहीं, तो देव भी नहीं

दानव नहीं, तो मानव भी नहीं 

राक्षस नहीं, तो आर्य भी नहीं

यौनोत्पीड़क नहीं, तो नारीपूजक भी नहीं

अपराधी नहीं, तो संत भी नहीं

राष्ट्रद्रोही नहीं, तो राष्ट्रप्रेमी भी नहीं

शत्रु नहीं, तो मित्र भी नहीं 

अन्याय नहीं, तो न्याय भी नहीं

असत्य नहीं, तो सत्य भी नहीं

पाप नहीं, तो पुण्य भी नहीं।

सह अस्तित्व ही है रहस्य

राजसिंहासन का।

रहना होगा सबको 

एक साथ

मिलजुलकर

यह देश सबका है

किसी के बाप का नहीं,

उनका भी नहीं

जिन्होंने रचा, गढ़ा और सँवारा

अपने तप और पुरुषार्थ से।

हमारी दृष्टि में 

सब हैं समान

और सम्माननीय

सभी का लक्ष्य है

ईश्वर की प्राप्ति

हम चलते रहेंगे

ऐसे ही 

लेकर सबको साथ

करते रहेंगे सबका विकास

पाप का भी, पुण्य का भी

और बन जायेंगे

विश्वगुरु।

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