ऋषि कामना करते रहे
सर्वे भवंतु सुखिनःपर व्याधियाँ होती रहीं, होती रहेंगी,
ऋषि कामना करते रहे
विश्व का कल्याण हो
पर युद्ध होते रहे, होते रहेंगे।
सब कुछ होता रहेगा
ऋषि भी कामना करते रहेंगे
परिभाषायें
कभी सीधी, कभी उलटी
कभी सजाई, कभी छिछियाई
गढ़ी जाती रहेंगी।
परिभाषायें
नये चोले में करती हैं उत्पात
धूर्तता का नया नाम आस्था
उत्पीड़क का नया नाम उत्पीड़ित
शोषक का नया नाम शोषित।
"अपराधी"
हो प्रशंसित, हो सम्मानित
"निष्ठावान"
हो भयभीत, हो अपमानित
कर रहे निर्माण
एक नये युग का।
एक दिन
उठा ले गये कुछ लोग
ऋषिपुत्री होलिका
बनाकर चमार।
होली
अब नहीं मनेगी,
मनाये जाएँगे
केवल भीमपर्व
गायी जायेगी भीमचालीसा
भारत बनेगा भीमलैण्ड
रहेंगे मूलनिवासी
कदाचित् कोई नयी प्रजाति!
बनेगा विधान
कि ब्याही जाएगी
ब्राह्मण दुहिता
मूलनिवासी को
फिर करना होगा पलायन
यूरेशिया में कहीं।
मारे जाने लगे पुजारी
पता नहीं क्यों
पीटे जाने लगे ब्राह्मण
पता नहीं क्यों
जलायी जाने लगी मनुस्ममृति
पता नहीं क्यों!
जाने बिना पुजारी
समझे बिना ब्राह्मण
पढ़े बिना मनुस्ममृति
लिख दिया 'अपराधी'
कहते हुये "न्याय"।
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