चर्चा है कि जाॅर्ज सोरोस और बिल गेट्स जैसे लोग पूरी दुनिया पर अपने मनमाने नियंत्रण के लिए राजनीतिक और प्राकृतिक शक्तियों को अपनी उंगलियों पर नचाते रहे हैं। प्रकृति पर नियंत्रण के लिए बिल गेट्स ने Geoengineering technique को अपना माध्यम बनाया है।
"नियंत्रण" शब्द अधिकार के गर्व, इच्छानुसार संचालन, ईश्वर हो जाने की अनुभूति और विजय के अहंकार से भरा हुआ है। मनुष्य पर नियंत्रण कर पाना बहुत कठिन है, कभी होता भी है तो दबाव हटते ही पूर्ववत हो जाता है। तो चलो प्रकृति पर नियंत्रण करते हैं और लंकेश होकर ईश्वर बन जाते हैं।आजकल विज्ञान के शब्दकोश में से दो शब्द उछल कर सोशल मीडिया में लोगों को आकृष्ट कर रहे हैं। एक है सोलर रैडिएशन मैनेजमेंट और दूसरा है क्लाउड सीडिंग जो जियोइंजीनियरिंग तकनीक के क्षेत्र से जुड़े हुये हैं।
जब ज्वालामुखी विस्फोट या मनुष्यकृत कारणों से धरती के किसी क्षेत्र में तापमान की बहुत वृद्धि हो जाती है तो उसे कम करने के लिए सौर विकिरण प्रबंधन(SRM) का प्रयोग किया जाता है। इसे Hygroscopic प्रक्रिया कहते हैं जिसके लिए उस क्षेत्र विशेष में सल्फ़र डाई आॅक्साइड का Stratospheric aerosol injection लगाकर ऊष्मा को अंतरिक्ष में फेकने का प्रयास किया जाता है।
एक और प्रक्रिया है - Glaciogenic जिसे कृत्रिमवर्षा और कृत्रिमहिमपात के लिए प्रयोग में लाया जाता है। सामान्यतः इसे क्लाउड सीडिंग कहते हैं जिसमें सिल्वर आयोडाइड, पोटेशियम आयोडाइड या फ्रोज़ेन कार्बन डाई आॅक्साइड जैसे रासायनिक द्रव्यों का उस क्षेत्र के वायुमंडल में छिड़काव कर प्राकृतिक प्रक्रिया को उत्तेजित किया जाता है। यह उसी तरह है जैसे लौकी में हार्मोन का इंजेक्शन लगाकर रात भर में लौकी की लंबाई और भार बढ़ा देना।
सुना है रावण ने भी प्राकृतिक शक्तियों पर नियंत्रण कर लिया था। हम तो इतना ही जानते हैं कि ईश्वरीय व्यवस्था में मानवीय हस्तक्षेप कभी लोककल्याणकारी नहीं होता।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणियाँ हैं तो विमर्श है ...विमर्श है तो परिमार्जन का मार्ग प्रशस्त है .........परिमार्जन है तो उत्कृष्टता है .....और इसी में तो लेखन की सार्थकता है.