शुक्रवार, 27 मार्च 2026

जैविकयुद्ध

अमेरिका और ईरान के अड़ियल व्यवहार के कारण अब गुरिल्ला युद्ध से भी अधिक गोपनीय और दबे पाँव होने वाले जैविक युद्ध की आशंकाएँ निरंतर बलवती होती जा रही हैं। सभी विकसित देशों के पास महासंहारक बायो-वीपन्स के भंडार उपलब्ध हैं।

कोरोना के नये-नये वैरिएंट्स आना कोई नयी बात नहीं रही, समाचार है कि अब प्राणघातक निपाह वायरस भी पूरी तैयारी के साथ आ चुका है।
इधर कैंसर की रोकथाम के लिए चौदह वर्ष के किशोरों/किशोरियों के लिए वैक्सीन आ गये हैं। यह मान लिया गया है कि यौन संबंधों से फैलने वाले पैपिलोमा वायरस से हमारे किशोर/किशोरियाँ संक्रमित हो सकते हैं इसलिए सभी लोगों को लगभग ३५९० रु. मूल्य वाले (मूल्य सरकार चुकाएगी) वैक्सीन के तीन डोज तो ले ही लेना चाहिए। यह वैक्सीन निर्भय होकर "यौनसंबंध बनाने का मार्ग" प्रशस्त करती है।
"HPV is highly infectious and predominantly spread through sexual contact, and HPV vaccines work best if they’re given before someone is exposed to the virus."
Gardasil 4/9 ; The cancer vaccine for girls, primarily known as the HPV vaccine (Human Papillomavirus), prevents infections that cause cervical and other cancers. It is highly effective and recommended for girls (and boys) aged 9–14, ideally *before sexual activity.* It is often given as a two-dose series, or three for older teens.
 
टीकाकरण की विश्वसनीयता मेरे लिए सदा से नकारात्मक रही है। वैज्ञानिकों का एक समुदाय टीकाकरण को नये वैरिएंट्स के जन्म का कारण मानता रहा है, विषाणुविज्ञान और इम्यूनोलाॅजी के तथ्य भी उसी के पक्ष में हैं। मैं यह नहीं समझ पाता कि जब इम्यूनिटी बनाये रखने के लिए हमारे पास बहुत से साधन उपलब्ध हैं तो सारा ध्यान वैक्सीनेशन पर ही क्यों केंद्रित रहता है? क्या यह स्वास्थ्य की नहीं अपितु केवल उद्योग की आवश्यकता है?
*सिकुड़ता वाय क्रोमोसोम*
एंटी कोविड-१९ वैक्सीन की न्यून कार्मिक अवधि हम सब देख चुके हैं। अब मुझे आशंका है कि एंटीबायोटिक्स और वैक्सीनेशन के अंधाधुंध प्रयोग के दुष्प्रभाव कहीं हमारे क्रोमोसोम पर भी तो नहीं पड़ रहे हैं! यह आशंका निर्मूल नहीं है। किसी वायरस को हमारे शरीर में प्रवेश करने के लिए किसी पासपोर्ट और वीसा की तो आवश्यकता नहीं होती न! यह वैक्सीनेशन की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, तब इंड्यूस्ड इम्यूनाइजेशन का क्या औचित्य? प्रचार किया जाता है कि टीकों में एटेनुएटेड वायरस या एंटीजेन सीरम का प्रयोग किया जाता है। यही प्रक्रिया तो प्रकृति की भी है, तब इंड्यूस्ड क्यों?
यह पाया जाता रहा है कि निर्धन परिवारों के मिट्टी में खेलने वाले बच्चों की रोगप्रतिकारक क्षमता उन बच्चों से अधिक होती है जो हाइजीन का बहुत अधिक पालन करते हैं। यह निर्धन देशों के लिए प्रकृति की निःशुल्क व्यवस्था है।
चिंता का विषय यही है कि कैंसर रोकथाम के नाम पर कहीं यह बिल गेट्स प्रायोजित जैविक युद्ध तो नहीं?

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