उन्होंने कहा
'सदा सच बोलो'मानकर हमने उनका आदेश
जब बोल दिया एक दिन
सब कुछ सच-सच
तो वे हो गये कुपित
और डाल दिया हमें
बंदीगृह में।
एक दिन उन्होंने दिया
एक उपदेश
'तमसोमा ज्योतिर्गमय'
मानकर हमने उनका आदेश
जब प्रज्वलित कर दिया
गहन तिमिर में एक दिया
तो वे कुपित हो गये
और डाल दिया हमें
अँधेरे बंदीगृह में।
उन्होंने कहा
'नीर-क्षीर विवेकी बनो'
मानकर हमने उनका आदेश
जब कह दिया एक दिन
नीर को नीर
और क्षीर को क्षीर
तो वे फिर कुपित हो गये
और दे दिया हमें
मृत्युदंड।
हम मर गये
मर कर मुक्त हुये
पांचभौतिक प्रपंच से
छोड़कर अंतिम संदेश
कि उपजाऊ क्षेत्र होता है
वैदिक ऋषियों का ज्ञान
प्रपंचियों के लिए
मठाधीशों के लिए
जहाँ बना दी जाती हैं
जीवित समाधियाँ
ऋषिपुत्रों की।
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