राजा ने कहा
अपनी प्रजा से -
तुम अत्याचार करते रहे
लाखों वर्षों तक
हमारे भाइयों पर
तुम उन्हें जीने नहीं देते थे
उत्पीड़ित करते थे
अपमानित करते थे
लाखों वर्षों तक ।
अब बदला लेंगे हमारे भाई
हमारी प्रजा से
जो आकर बस गई थी
हमारे देश में
लाखों साल पहले ।
राजा ने विधान बनाया
राजा के भाइयों ने संकेत समझा
और फिर प्रारम्भ हुआ
ऐसा उत्पीड़न
जिसकी योजना बना ली गयी
इस सभ्य युग में
और प्रजा
प्रतीक्षा कर रही है
कहाँ छिपे मोरे श्याम !
आवो
अब और सहा नहिं जाय ।
राजा अट्टहास कर रहा है
सुनकर अपनी प्रजा का
आर्तनाद ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणियाँ हैं तो विमर्श है ...विमर्श है तो परिमार्जन का मार्ग प्रशस्त है .........परिमार्जन है तो उत्कृष्टता है .....और इसी में तो लेखन की सार्थकता है.