बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

कहीं और

दिल्ली में धुआँ है

चलो कहीं और चलें

धुयें से दूर

कोलाहल से दूर

अराजकता से दूर

हिमालय की गोद में कहीं!     

हाँ! किसी पहाड़ी गाँव में

यह ठीक लग रहा है, 

इंडस वैली नाम है इसका

हिमालय में इंडस वैली! 

कुछ विचित्र सा नहीं लगा आपको! 

उहूँ...नाम छोड़िए, 

सामने देखिए 

पंचाचूली पर्वत शृंखला

ॐ पर्वत 

पास ही एक अन्य शिखर

जैसे किसी नगर का चित्र।    

जहाँ मिलती है धरती

आकाश से

वहाँ घटित होते हैं 

पल-पल बहुतेरे चित्र

मोतीहारी वाले मिसिर जी ने बताया - 

"जाकी रही भावना जैसी

प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।" 

बहुतेरे चित्र

पर सभी आभासी

इंडस वैली की तरह

जो है तो गाँव 

पर आँखें गड़ाकर देखने से 

दिखता है 

एक और मरता हुआ नगर

कचरा 

और धुआँ। 

दिल्ली की तरह यहाँ भी दो कचरे हैं

एक बौद्धिक

दूसरा भौतिक 

बौद्धिक कचरा आग लगाता है

भौतिक कचरा जलता है

आग धीरे-धीरे लगती है 

कचरे के ढेर में

जिसमें होती हैं 

पाॅलीथिन की थैलियाँ

प्लास्टिक की खाली बोतलें

ब्रेड और बीकानेरी भुजिया की 

खाली थैलियाँ...।  

बौद्धिक कचरा भी

उच्च श्रेणी का है यहाँ

सेना के सेवानिवृत्त उच्चाधिकारी, 

कोई धनाढ्य व्यापारी

या कोई प्रोफ़ेसर.... 

सच कहूँ 

तो यह गाँव है ही सेवानिवृत्त लोगों का

जो आकर बसे हैं यहाँ 

पहाड़ में दिल्ली को जीने

हाँ! ठीक सुना आपने

पहाड़ में

दिल्ली को जीने।   

एक दिन चुपके से कहा

ॐ पर्वत ने मेरे कान में

देखा तुमने

दिल्ली स्वयं चलकर आ गई

हमारे पास 

अब हमें जाना होगा 

यहाँ से

कहीं और दूर।  

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