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बुधवार, 18 मार्च 2026

विकल्प

समाज के विघटनकारी ध्रुवीकरण के लिए जितने उत्तरदायी मोदी, मोहन भागवत और अमित शाह हैं, स्वयं हिंदू समाज भी उनसे कम दोषी नहीं है। भ्रष्टाचार से समझौता कर चुके हिंदू समाज ने मुस्लिम आतंकवाद से मुक्ति की आशा में कांग्रेस के विकल्प स्वरूप भाजपा पर विश्वास किया और उसके भक्त हो गये। मोदी प्रारंभ में तो अवश्य हिंदू राष्ट्र की बात करते रहे पर इसके बाद उन्होंने न केवल सवर्णविरोधी विषाक्त वक्तव्य भी दिये अपितु सनातनियों के सामान्य नागरिक अधिकार छीनने के षड्यंत्र भी करते रहे हैं, जिसके परिणाम स्वरूप सवर्ण इस देश का सर्वाधिक असुरक्षित, पीड़ित और वंचित समूह होता चला गया। हिंदूराष्ट्र की आशा में हम सब मोदी के विषाक्त भाषणों की अनदेखी करते रहे, हमारी भक्ति अपने चरम की ओर बढ़ती रही और मोदी हमारे समूल उच्छेदन के बीज बोते रहे। मोदी के विषाक्त भाषणों के बाद भी लगातार तीन बार हमने मोदी को देश की बागडोर सौंपी, पर कभी विकल्प के बारे में सोचा भी नहीं।

आप अपनी गाड़ी में एक वैकल्पिक चक्का रखते हैं पर लोकतंत्र के रथ में कभी किसी ने वैकल्पिक चक्के की आवश्यकता नहीं समझी। सावधान! किसी एक पर अतिनिर्भरता शोषण के कई द्वार खोलती है। मोदी और उनके मंत्रियों ने केवल उन लोगों की चिंता की जो देश को आगे ले जाना तो दूर सदा बाधक और विनाशक ही बने रहे, वह भी उन लोगों के शोषण और उत्पीड़न के मूल्य पर जो देश के विकास और समृद्धि के सदा से महत्वपूर्ण कारण रहे हैं। यह केवल विकासकारी तत्वों की उपेक्षा का ही विषय नहीं है, अपितु उनके साथ घृणित अत्याचार और शोषण की क्रूरता का भी विषय है।
हिंदू हृदय सम्राट नरेन्द्र मोदी के शासनकाल में हमने भोगा है -
विद्यालयों में हिंदू बच्चों के साथ भेदभाव और उत्पीड़न, सांस्कृतिक चिन्हों और प्रतीकों के अपमान की बढ़ती घटनायें, मतांतरण का दबाव, प्रेमजेहाद, भूमिजेहाद, चिकित्सा जेहाद, सांस्कृतिक जेहाद...। हम भोग रहे हैं सर तन से जुदा की क्रूर घटनायें, हिंदू पलायन, खाद्य-पेय पदार्थों में थूक-मूत्र मिलाने की निरंकुश घटनायें, सवर्णों को जूते मारकर यूरेशिया भगाने की धमकियाँ, ब्राह्मण कन्यायों के यौनोत्पीड़न की घटनायें, सवर्ण होने के कारण मारपीट और हत्यायें, आरक्षण के नाम पर सवर्णों को बिना किसी निरीक्षण-परीक्षण के अपराधी मानकर कारागार में डाल देने वाले विधान के प्रस्ताव को न्यायसंगत सिद्ध करने के विनाशकारी हठ, प्रतिभापलायन की स्थितियाँ उत्पन्न करने के लिए विविध उपाय.... सवर्ण यही सब देखने और भोगने के लिए विवश होते रहे हैं। भाजपा ने अपने राजनीतिक चरित्र से बारंबार प्रमाणित किया है कि हिंदू समाज को तोड़ने में वे कांग्रेस और सपा से भी बहुत आगे निकल चुके हैं। तथापि, यूजीसी रेगुलेशन बिल लाने के लिए मोदी जी और उनकी "यूजीसीसमिति" के लोग धन्यवाद के पात्र हैं जिन्होंने सारी नैतिकताओं की लक्ष्मण रेखायें पार कर हिंदुओं को जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अभी भी समय है, राष्ट्रवादी नागरिकों को भाजपा, कांग्रेस और सपा के विकल्प गठन पर गंभीरता से विचार करना ही होगा। हम किसी भी वर्तमान राजनैतिक दल पर भरोसा कर पाने की स्थिति में नहीं हैं। सभी दल अरविंद केजरीवालसंप्रदाय और कांग्रेस का अनुसरण करने की प्रतिस्पर्धा में दौड़े चले जा रहे हैं। जब सत्ता निरंकुश होती है तो जनता को अपने दायित्व निभाने के लिए आगे आना होता है।

सोमवार, 16 मार्च 2026

आत्मनिर्भर पराधीन भारत

इसमें कोई संदेह नहीं कि आईटी में निष्णात होने के बाद भी हम आत्मनिर्भर नहीं हैं इसलिए अमेरिका से पंगा नहीं ले सकते। चीन और रूस के पास उनकी अपनी-अपनी आईटी व्यवस्था है।

हमारे आईटी वैज्ञानिक अमेरिका में काम करके उसे आत्मनिर्भर बनाते हैं। कुछ पूर्णनिर्लज्ज माननीय जी यह भी कह सकते हैं कि भारतीय वैज्ञानिक लालची और देशद्रोही होते हैं इसलिए वे पलायन कर जाते हैं। स्वयंभू हिंदू ठेकेदार कह देंगे कि हिंदू वैज्ञानिकों में राष्ट्रप्रेम और संस्कारों का अभाव है। माँ-बाप को चाहिए कि अपने बच्चों में जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी का भाव जागृत करें और मुसलमानों में छिपे हुये अपने पूर्वजों के डीएनए पहचानें जिससे भारत की प्रतिभा पलायन को रोका जा सके।
मेरा मत इन सभी विद्वानों, तर्कशास्त्रियों और राष्ट्रप्रेमियों से पूरी तरह भिन्न है। यूजीसी प्रकरण के बाद की घटनाओं ने मुझे राष्ट्रप्रेमी से कम्युनिस्ट बना दिया है। यह मेरे लिए वांछनीय नहीं था, किंतु वैचारिक व्यभिचार की यंत्रणा से बिलबिलाकर मुझे कम्युनिज्म की कड़ाही में कूदने के लिए विवश होना पड़ा है। ...तो अब मुझे चीनी व्यवस्था भारतीय व्यवस्था की तुलना में कई गुना अच्छी लगने लगी है। हम पाखंडी और षड्यंत्रकारी हैं, चीन में जो भी है अच्छा-बुरा सब खुला हुआ है। कहीं कोई ढकोसला नहीं। भारत में टाटा है सुंदर पिचाई है, इसके बाद भी आईटी में हम पराधीन हैं और अमेरिका को आत्मनिर्भर बना रहे हैं।
महाभारत टीवी धारावाहिक में हम वर्षों पहले क्लस्टर बाण वर्षा की अवधारणा को देख चुके हैं, ईरान ने क्लस्टर अग्निबाण बना भी लिए और हम आत्ममुग्धता के अतिरिक्त कुछ भी नहीं कर पाये।
हम २०१४ से २०२५ तक लगातार ११ वर्षों तक राष्ट्रप्रेम में इतने डूबे रहे कि यह भी नहीं देख सके कि अगर अमेरिका ने अपनी आईटी के दरवाजे हमारे लिए बंद कर दिए तो पूरा भारत ठप्प हो जाएगा। इसरो, आर.एण्ड डी., बैंक, उद्योग, परिवहन, कार्यालयीन कार्य, साइबर प्रणालीऔ... सब में आपातकाल लग जाएगा।
तो क्या किया जाय?
कुछ न किया जाय। हिंदुत्व और राष्ट्रप्रेम में डूबे रहा जाय। यूरेशियन भारत छोड़ो को सुना जाय। तिलक तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार गीत का आनंद लिया जाय, और अपनी बेटियों का "शुद्धिकरण" करवाने के लिए, जो माँग रहे हैं उन्हें सौंप कर उनके संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाय। तदुपरांत हिंदूसमाज में बोई जाती रही आरक्षण की विषबेल में मधुर और सुगंधित फल लगने प्रारंभ हो चुके हैं, उन्हें तोड़कर खाया जाय और चैन की नींद सोया जाय। जब नींद खुलेगी तब सामने खड़े पाषाणयुग को भी स्वीकार करके जी लेंगे। बाकी काम तो महामानव और ठेकेदार कर ही रहे हैं।

रविवार, 15 मार्च 2026

प्रतिस्पर्धा

भारत के अय्यर ब्राह्मण आदिशंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित अद्वैत समर्थित षण्मत (शिव, विष्णु, शक्ति, सूर्य, गणेश और स्कंद) के उपासक माने जाते हैं। आदिशंकराचार्य ने तत्कालीन षण्मत मतभेंदों को समाप्त करने के लिए जिस अद्वैत मत को प्रतिपादित किया, मणि शंकर अय्यर उसी स्मार्त (स्मृति) परंपरा के वाहक हैं। आदिशंकराचार्य शाकाहारी थे पर मणि शंकर अय्यर ने "कबाब प्रतिस्पर्धा" के आयोजन का आह्वान किया है, जो भारत और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित है।

मणिशंकर अय्यर के सम्मान में प्रस्तुत है यह रचना -

असहिष्णुता से बोली
सहिष्णुता,
हिंसा से बोली
अहिंसा
आओ वार्ता करें
कुछ प्रतिस्पर्धा करें
"यद्यपि अच्छे हो सकते हैं
तुम्हारे कबाब,
पर अच्छे हैं हमारे कबाब भी
तुम्हारे कबाबों से"।

समान है
हमारी भाषा, मानसिकता और संस्कृति
समान है उर्दू और संस्कृत
समान है रक्त और दुग्ध
समान है पैगंबरवाद और बहुदेववाद
समान है घृणा और प्रेम
समान है मृत्यु और जन्म
आओ हम एक हो जाएँ
मृत्यु में समाहित हो जाएँ
षण्मत को परे हटायें
एक थाली के कबाब हो जाएँ
गाय खाएँ, वाराह भगाएँ
भारत को विभाजन से बचाएँ।

युग नया है
आदिशंकराचार्य विगत हुये
पैगंबर सामयिक हुये
स्मृति लुप्त हुई
हदीस गीता हुई
आओ, हम हदीस गाएँ
देश को विभाजन से बचाएँ।

एकेश्वरवाद की कट्टरता
सहिष्णुता लाती है,
स्मृति
हमें असहिष्णु बनाती है
देश को हिंदूराष्ट्र बनाती है
हिंदूराष्ट्र एक वैश्विक संकट है
जिससे अवश्यंभावी है होना
देश के तेंतालीस टुकड़े।
आओ, हम देश बचाएँ
भारत को पाकिस्तान में मिलाएँ।

उसने फेक दी
उठाकर शिव की मणि
हिंदमहासागर में नहीं
अरबसागर में
चबाते हुए कबाब
होकर चिंतित
कि होने ही वाले हैं
देश के तेंतालीस टुकड़े
आओ, हम देश को बचाएँ
भारत को पाकिस्तान में मिलाएँ।

मंगलवार, 7 सितंबर 2021

बराबरी का हिस्सा चाहिये

         ब्रिटिश इण्डिया के समय मुसलमानों को अपने लिये एक हिस्सा चाहिये था । उन्हें पश्चिम में ईरान और पूर्व में म्यानमान की सीमाओं से लगे क्षेत्र पाकिस्तान बनाने के लिए दे दिये गये । बटवारे के बाद भी मुसलमानों की एक बहुत बड़ी जनसंख्या  भारत में ही बनी रही । अब एक बार फिर मुसलमानों को बराबरी का हिस्सा चाहिये । ओवेसी, वारिस पठान और रहमानी जैसे लोगों ने आवाज़ बुलंद कर दी है कि उन्हें हिंदुस्तान की सियासत में बराबरी का हिस्सा चाहिये । उनके अनुसार उन्हें यह हक भारत के संविधान ने दिया है । आप भारत को हिंदूराष्ट्र बनाने की माँग करने से डरते हैं । मुसलमान भारत में शरीयत लागू करने के लिये सड़कों पर नारे लगाते हैं ।

आपने सुना किन्तु उसका भावार्थ नहीं समझा, जब उन्होंने कहा कि वे वंदे मातरम नहीं कहेंगे लेकिन उन्हें हिंदुस्तान की धरती से मोहब्बत है । नादिरशाह और हमायूँ को भी हिंदुस्तान की धरती से मोहब्बत थी । उन्हें ईद के बकरे से भी मोहब्बत होती है । उन्हें हर ख़ूबसूरत चीज से मोहब्बत होती है जिसका वे उपभोग कर सकते हैं । हम भारत की धरती की पूजा करते हैं । हम जिसकी पूजा करते हैं उसका उपभोग करना हमारे संस्कारों में नहीं है, इसीलिये हमने किसी दूसरे मुल्क पर धरती की मोहब्बत में हमला नहीं किया, वहाँ के रहवासियों का कत्ल-ए-आम नहीं किया, वहाँ की धरती को रौंदा नहीं, वहाँ के लोगों को तबाह नहीं किया, वहाँ की स्त्रियों से बलात-यौनाचार नहीं किया । वे हमारी धरती से मोहब्बत करते रहे और हमारे मंदिरों को लूटते रहे, हमारी बहुओं-बेटियों की इज्जत लूटते रहे । मोहब्बत को हम इबादत समझते रहे और ख़ुद को तबाह करने के लिए उन्हें अपने आपको सौंपते रहे ।

छोड़िये, आप इतिहास को कुरेदना नहीं चाहते । वर्तमान को तो देख सकते हैं न! देखिये... आँखें खोलकर देखिये, अच्छी तरह देखिये, उन गढ़ी हुई परिभाषाओं को देखिए जो आपके अधिकारों को छीनने के लिये आपको पढ़ायी जाती रहीं, उन धमकियों को देखिये जो आपके स्वाभिमान को ललकारती हैं, उन घोषणाओं को देखिये जो आपको विदेशी मानती हैं और मुसलमानों को भारत का मूल नागरिक ।

मुसलमानों के तेवर और उनकी तैयारियों को देखकर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि वे अब भारत के और नये टुकड़े से संतुष्ट नहीं होंगे बल्कि उन्हें पूरा भारत चाहिये । उन्हें मुसलमान मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री चाहिये । उन्हें विधानसभा में नमाज के लिये एक हॉल चाहिये फिर एक दिन उन्हें शरीयत भी चाहिये । यह सब होगा । आप गाते रहिये – कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी । ख़याली पुलाव पकाने और आत्ममुग्धता में डूबे रहने से कोई किला नहीं जीता जाता, हाँ! जीता हुआ किला हारा ज़रूर जाता है ।

दिल्ली के मुख्य मंत्री हर विधान सभा क्षेत्र में उर्दू और इस्लाम की तालीम के लिए सरकारी स्कूल खोलने जा रहे हैं । यही सेक्युलरिज़्म है, संविधान नें उन्हें इस काम के लिए अधिकार दिया है । संविधान में हिंदुओं के क्या अधिकार हैं, इसकी  कोई चर्चा नहीं होती । चर्चा इस बात की होती है कि सनातन धर्म की शिक्षा सरकारी स्कूलों में देना इस्लाम का अपमान ही नहीं बल्कि धार्मिक ध्रुवीकरण भी है । इससे हिंदू आतंकवाद फैलेगा । ये बातें चौबीस घण्टे दोहरायी जाती हैं । हम इन बातों के अभ्यस्त हो जाते हैं फिर इसी को सच मानने लगते हैं । भारत आने वाले समय में अफगानिस्तान बनने बनने वाला है । आप गंगा-जमुनी तहज़ीब और भाईचारे की ढोलक बजाते रहिये । उन्हें हिंदुस्तान में “पाकिस्तान ज़िंदाबाद” और “हिंदुस्तान मुर्दाबाद” चाहिये ।